धन प्रापति या कोई और उपाय कब आरम्भ करें... ?
अक्सर किसी उपाय को करते समय यह समस्या बहुत से पाठकों के सामने आती है कि यह धन प्रापति या कोई और उपाय कब आरम्भ करें कैसे वे कब प्रारम्भ करें ? इस बारे में में संक्षिप्त रूप में बता रहा हूं कि आप उपाय कब आरम्भ करें ?
आप कोई भी उपाय किसी भी शुक्ल पक्ष में उस उपाय के प्रतिनिधि दिन से से उपाय आरम्भ कर सकते हैं। उदाहरण के लिये आपको कोई धन प्राप्ति के लिये लक्ष्मीजी से सम्बन्धित उपाय करना है तो आप किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार आरम्भ कर सकते हैं अथवा कोई ऐसा उपाय करना है जो शनिदेव से सम्बन्धित हो तो किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से आरम्भ कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त यदि आप अधिक व शीघ्र लाभ चाहते हैं तो अपनी राशि के अनुसार चन्द्र की राशि का ध्यान रखें अर्थात् आप जिस उपाय को आरम्भ कर रहे हैं, उस दिन आपकी राशि के अनुसार चन्द्र का चयन करें अर्थात् उस दिन आपके बोलते नाम से चन्द्र चौथा, आठवां अथवा बारहवां न हो। इसके साथ ही रिक्ता तिथि अर्थात् चतुर्थी, नवमी अथवा चतुर्दशी न हो, घर में सूतक अथवा सोवर न हो अर्थात् किसी की मृत्यु अथवा बच्चे के जन्म के बारह दिन के अन्दर यह प्रयोग नहीं करना चाहिये।
वैसे महान ज्योतिषी वाराहमिहिर ने कोई भी कार्यसिद्धि के लिये वर्ष में माह अनुसार प्रत्येक दिन में कुछ समय को अमृत तुल्य माना है। उन्होंने उस समय की इतनी प्रशंसा की है जो यहां लिखी नहीं जा सकती है। यदि आचार्य वाराहमिहिर के बताये अनुसार समय पर कोई उपाय आरम्भ किया जाये तो उसके निष्फल होने की कहीं संभावना ही नहीं होती है। इसके लिये आवश्यक है कि समय के साथ आपको उस उपाय पर पूर्ण विश्वास होना चाहिये। यदि उस उपाय की कोई विधि हो तो वह उपाय विधि अनुसार ही करना चाहिये। अग्रांकित सारणी में आपको मैं आचार्य वाराहमिहिर द्वारा बताये समय दर्शा रहा हूं।
यदि आपको कोई दिन का उपाय आरम्भ करना है तो आप उपाय के प्रतिनिधि दिन 11.36 से लेकर 12.24 के मध्य आरम्भ कर सकते हैं। भारतीय ज्योतिष में इस समय को अभिजीत मुहूर्त माना जाता है। आचार्य वाराहमिहिर के बताये समय में हमको तिथि, योग, करण, नक्षत्र अथवा चन्द्र बल देखने की भी आवश्यकता नहीं होती है। यहां मैं आपसे मैं पुनः कहूंगा कि आप यदि कोई विशेष उपाय करना चाहते हैं तो बात अलग है अन्यथा शुक्ल पक्ष के दिन से भी आरम्भ कर सकते हैं।
अब मैं आपको तिथि के अनुसार कार्यसिद्धि का समय बताता हूं। इसको आप सामान्य ज्ञान के रूप में लें और यदि कोई उपाय करना चाहें तो कर सकते हैं
1. प्रथमा / पड़वा- स्तम्भन प्रयोग।
2. द्वितीया/दूज/दौज- उच्चाटन प्रयोग । 3. तृतीया / तीज- आकर्षण प्रयोग।
4. चतुर्थी/चौथ- स्तम्भन प्रयोग।
5. पंचमी/पांचा- मारण प्रयोग अथवा शत्रु को कष्ट देने वाले प्रयोग।
6. षष्ठी/ छठ- उच्चाटन प्रयोग।
7. सप्तमी- वश्य अर्थात् वशीकरण प्रयोग ।
8. अष्ठमी / आठा- सम्मोहन प्रयोग ।
9. नवमी / नौमी- सम्मोहन प्रयोग।
10. दशमी- सौम्य प्रयोग (इस तिथि को यदि गुरुवार अथवा पुष्य नक्षत्र हो तो कुछ भी न करें)
11. एकादशी/ग्यारस- मारण अथवा शत्रु को हानि देने वाले प्रयोग ।
12. द्वादशी / बारस- मुख स्तम्भन तथा मारण प्रयोग।
13. त्रयोदशी/तेरस- आकर्षण व वश्य अथवा वशीकरण प्रयोग अथवा सम्मोहन प्रयोग ।
14. चतुर्दशी/चौदस- स्तम्भन प्रयोग ।
15. पूर्णिमा / पूनौ- मारण प्रयोग तथा शत्रु नाशक प्रयोग ।
30. अमावस्या / मावस- कोई भी सिद्धि के प्रयोग। यदि इस तिथि को मंगलवार हो तो कोई महत्त्वपूर्ण सिद्धि करें। मंगली अमावस्या अर्थात् मंगलवारी अमवस्या को सिद्धि जल्दी प्राप्त होती है।
अब मैं आपको सामान्य दिन के अनुसार प्रयोग करने के बारे में बताता हूं। यह शास्त्र सम्मत तो है परन्तु मेरे अनुभव में शीघ्र सफलता नहीं मिलती है। पूर्वकाल में मिलती होगी तो अलग बात है क्योंकि वह समय और था तथा उपाय करने वाले भी अत्यधिक ज्ञानी होने के साथ निस्वार्थी हुआ करते थे।
मैं यह भी केवल आपको सामान्य ज्ञान के लिये बता रहा हूं फिर भी यदि आप इन दिनों के आधार पर प्रयोग करना चाहें तो मेरी सलाह है कि आप केवल शान्तिदायक अथवा लक्ष्मीकारक प्रयोग ही करें और वह भी केवल शुक्लपक्ष के जेठे दिन को अर्थात् जिस दिन आप उपाय करें वह दिन शुक्लपक्ष का प्रथम दिन हो।