totke ! vashikaran totka ! tona totka धन की देवी माँ लक्ष्मी को कैसे आमंत्रित करें ?

 totke ! vashikaran totka ! tona totka धन की देवी माँ लक्ष्मी को कैसे आमंत्रित करें ?

धन की देवी माँ लक्ष्मी को कैसे आमंत्रित करें ?


धन की देवी माँ लक्ष्मी को अपने निवास में आमंत्रित करने की हार्दिक इच्छा प्रत्येक व्यक्ति के मन में रहती है परन्तु अधिकांशतः व्यक्तियों को माँ लक्ष्मी को आमंत्रित करने का सही मार्ग नहीं मालूम होता है। माँ लक्ष्मी को आमंत्रित करने की विस्तारित विधि तो आपको अनेक पुस्तकों में प्राप्त हो जायेगी परन्तु जो सरल और सही विधि होती है वह यहां पर मैं आपको बताने का प्रयास कर रहा हूं। मैं सदैव से यही कहता आया हूं कि माँ को आमंत्रित करने के लिये यह आवश्यक नहीं है कि आपको संस्कृत का पूर्ण ज्ञान हो। माँ को आमंत्रित करने के लिये आपकी भावना और प्रेम की आवश्यकता होती है। यदि माँ को आमंत्रित करने के लिये संस्कृत की आवश्यकता होती तो आज हर विद्वान पर माँ लक्ष्मी की कृपा होती और वह धनवान होता। यहां पर मैं आपको धन की देवी को आमंत्रित करने के लिये कुछ सरल नियम और उपाय बता रहा हूं और पूर्ण आशा करता हूं कि आप अवश्य ही लाभान्वित होंगे


1. यदि आप चाहते हैं कि आपके निवास में माँ लक्ष्मी का स्थाईवास रहे और आप हृदय से माँ लक्ष्मी को आमंत्रित करना चाहते हैं तो आमंत्रण का आरम्भ अपने निवास से ही करना होगा अर्थात आप सदैव अपने निवास को पूर्णतः स्वच्छ रखें तथा प्रेमपूर्ण वातावरण हो। बिल्कुल भी क्लेश न हो। माँ लक्ष्मी का स्थाईवास उसी भवन ही होता है जहां प्रेमपूर्ण वातावरण के साथ स्वच्छता भी हो।


2. आपके निवास में माँ लक्ष्मी का प्रवेश तभी संभव है जब आपके निवास में पूजा-पाठ आदि नियत समय से हों। रसोई में भी किसी प्रकार की कोई गंदगी न हो। झूठा आदि भोजन का प्रयोग न हो तथा घर की लक्ष्मी अर्थात आपकी पत्नी भी रसोई में स्नान आदि के बाद प्रवेश करे।


3. आप भोजन की प्रथम रोटी पर सरसों के तेल के छींटे देकर गाय को दें। महीने में एक बार अपने पितरों के भोजन की थाली निकालें।


4. दीपावली की रात्रि में आप अपने दायें हाथ का एक चांदी का कड़ा बनवा कर दीपावली पूजन करें। यह कड़ा माँ लक्ष्मी के चरणों से स्पर्श कराकर पूजा स्थल में ही रखा रहने दें। अगले दिन स्नान कर माँ लक्ष्मी का पूजन कर कड़े को अपने दायें हाथ में धारण कर लें। यह कड़ा आप धनतेरस को खरीदें तो अधिक शुभ रहेगा।


5.  यदि दीपावली शुक्रवार और रविवार की न हो तो आप यह उपाय अवश्य करें। इस उपाय में आप पूजन से पहले पान के पो पर एक पनीर की मिठाई, एक बताशा, एक हरी इलायची, एक कोई पीली मिठाई रखें। उस पर शक्कर का पावडर डाल कर थोड़ी सी रोली छिड़क कर निकट के पीपल वृक्ष पर जायें। पीपल का पूजन करें। पीपल को प्रणाम कर वृक्ष पर दीपक व धूप-अगरबत्ती अर्पित कर पान के पत्ते को भी अर्पित करें और फिर जल देकर प्रणाम करें और निवास पर आ जायें। घर में हाथ-पैर धोकर ही प्रवेश करें। अब आप निश्चित होकर पूजन करें। आने वाले शनिवार अथवा मंगलवार से जो भी पहले आये तब आप उपरोक्त क्रिया पुनः करें।


 कहने का अर्थ यह है कि दीपावली पर उपाय करने के बाद 2 मंगलवार और 2 ही शनिवार को यह उपाय और करना है। जब आप अन्तिम दिवस उपाय करें तो साथ में कच्चा दूध भी ले जायें। वृक्ष को जल अर्पण के बाद दूध भी अर्पित करें। जिस स्थान पर दूध से मिट्टी गीली हो जाये, उस गीली मिट्टी से स्वयं के तिलक कर उपाय में जो भी जाने-अंजाने कोई चूक हुई हो तो उसकी क्षमायाचना करें और प्रणाम कर निवास पर आ जायें। इस उपाय से आपने जिस प्रकार से माँ लक्ष्मी को अपने निवास में आमंत्रित किया है और माँ ने किस प्रेम से प्रवेश किया है, वह आप स्वयं ही महसूस करेंगे।


6. यह उपाय आप किसी भी शुक्लपक्ष में कर सकते हैं। पंचमी अथवा नवमी तिथि को सांध्यकाल में निवास के पूजा स्थल में ही एक बाजोट पर लाल वस्त्र पर बिछा कर पांच अभिमंत्रित गोमती चक्र, इतनी ही धनकारक कौड़ियां और एक अभिमंत्रित समृद्धिदायक यंत्र को स्थान दें। तत्पश्चात् केशर से सारी सामग्री पर तिलक करें। चमेली के तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करें। चंदन की धूप-अगरबत्ती अर्पित करें और कोई मिष्ठान को भोग के रूप में अर्पित कर कमलगट्टे की माला से निम्न मंत्र का 11 माला जाप करें- श्रीं ह्रीं श्रीं देवि श्रीहरिप्रियायै नमो नमः ।


जाप के बाद आप प्रणाम कर उठ जायें। अगले दिन यही क्रिया करें। इस प्रकार से आपको पांच दिन तक यह पूजन इसी विधि से करनी है। पांचवें दिन मध्यरात्रि में पूजन करें। पूजन के बाद बाजोट से सारी सामग्री यंत्र सहित उठा कर एक लाल रंग की रेशमी थैली में बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रखें। उपाय बाद ही चमत्कार आपके सामने होगा। के कुछ समय


7.  किसी भी पूर्णिमा को आप निकट के माँ शक्ति मन्दिर में जाकर जो भी आप पूजा कर सकते हैं, वह पूरी शुद्ध भावना से करें। जो आप भोग अर्पित करना चाहें वह अर्पित कर सकते हैं। वापिसी में पुजारी से मांग कर एक पुष्प लायें। यदि गुलाब का पुष्प हो तो बहुत अच्छा है अन्यथा कोई भी पुष्प हो। अब आप अपने निवास पर आकर पत्नी के हाथ से और यदि विवाह नहीं हुआ है तो माँ खीर बनवायें। खीर में शक्कर के स्थान पर मिश्री का उपयोग करें। खीर को किसी हाथ से साबूदाने की शुद्ध स्थान पर रख कर निवास के ही पूजा स्थल में मानसिक रूप से माँ महालक्ष्मी का ध्यान कर माँ की तस्वीर पर रोली से तिलक कर शुद्ध घी का दीपक व तीव्र सुगंध  की अगरबत्ती व धूप अर्पित करें। पीले मिष्ठान का भोग लगाये। 

अब मध्यरात्रि में निवास के मध्यस्थान पर एक सरसों के तेल का दीपक जला कर आकाश की ओर दिखाते हुये मानसिक रूप से माँ महालक्ष्मी को अर्पित करें। इसी प्रकार से साबूदाने की खीर को भोग के रूप में अर्पित करें तथा साथ में किसी पात्र में जल भी अर्पित करें। अब सारी सामग्री को मध्यस्थल पर ही रखा रहने दें। खीर को इस प्रकार से रखें कि बिल्ली आदि न खा सके। खीर को किसी जाली आदि से ढक भी सकते हैं। इसके बाद आप भूमि शयन करें। अगले दिन जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर सर्वप्रथम जल और खीर उठायें और किसी सुरक्षित स्थान पर रख दें। अब पूजा स्थल में माँ लक्ष्मी का पूजन करें। मानसिक रूप (जैसे हे माँ महालक्ष्मी, मैं तेरे आगमन का हृदय से आभारी हूं, इसी प्रकार से आप कुछ भी कह सकते हैं परन्तु यह अवश्य ध्यान रखें कि आप धन्यवाद कदापि न दें) से माँ महालक्ष्मी के आगमन का स्वागत करें। अब रात्रि में जो आपने जल मध्यस्थल पर रखा था, उस जल को निवास की सभी दीवारों पर छिड़क दें। खीर को अपनी पत्नी के साथ सेवन करें। 


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