दीपावली पर किये जाने वाले धन प्राप्ति के उपाय -2
1. यदि आपके परिवार में खर्च अधिक होता है अथवा आय की कमी है तो आप दीपावली पर यह उपाय अवश्य करें। इस उपाय को दीपावली पूजन के साथ ही करना है। दीपावली की रात्रि में पूजन के समय आप 21 अभिमंत्रित गोमती चक्र एवं 21धनकारक कौड़ियां एवं एक लघु नारियल की व्यवस्था कर लें। पूजन के लिये जो बाजोट अथवा चौकी की व्यवस्था की है, उसके पास ही एक अन्य बजट रखें। उस पर पीले अथवा लाल रंग का वस्त्र बिछा कर कौड़ियां, एवं लघु नारियल को स्थान दें। रोली से तिलक कर माँ लक्ष्मी का स्मरण करते हुये धूप-दीप अर्पित करें और दीपावली पूजन करें।
अब आप अगले दिन उनमें से गोमती एवं चार ही धनकारक कौड़ियां उठाकर घर के चारों कोनों में अन्दर की और एक-एक जोड़ा गाड़ दें तथा 11-11 चक्र एवं कौड़ी लाल वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें। बचे छः कौड़ियों और गोमती चक्र में से 3-3 को पूजा स्थल में ही रखा रहने दें और तीन-तीन को लघु नारियल के साथ किसी श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर में जाकर माँ लक्ष्मी को अपने निवास स्थल पर स्थाई रूप से पास करने का निवेदन करते हुये अर्पित कर दें। कुछ ही समय में आप स्वयं चमत्कार देखेंगे कि किस प्रकार से आपकी आय में वृद्धि हुई है और बेकार के खर्चों पर रोक लगी है।
2. यह उपाय भी यदि दीपावली पर करेंगे तो आपको आशा से भी कहीं अधिक का लाभ प्राप्त होगा। उपाय के बाद आप इस उपाय के फल को अनुभव करेंगे तो निश्चित ही आपको जो फल मिलेगा उसे चमत्कार मानेंगे। यह उपाय भी आपको दीपावली पूजन के साथ ही करना है। आप चाहें तो इसे अलग से भी कर सकते हैं किन्तु करना दीपावली की रात को ही है। दीपावली की रात्रि में आप लक्ष्मी जी की पूजा स्थान के पास ही एक अन्य बाजोट रखें। उस पर लाल रेशमी वस्त्र सवा मीटर लेकर चार तह करके बिछा दें। उसके ऊपर 21 अभिमंत्रित गोमती चक्रों को रख कर रोली से तिलक करें। एक गोमती चक्र अलग से ही रहने दें। चक्रों के आगे एक शुद्ध घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें धूप-अगरबत्ती अर्पित करें और फिर माँ लक्ष्मी एवं श्रीहरि विष्णुजी का कोई भी पाठ करें।
पाठ के बाद अलग वाला गोमती चक्र उठाकर कर घर से बाहर आ जायें और किसी निर्जन स्थान पर आकर चक्र को अपने ऊपर से सात बार उसार कर अपने पीछे फेंक दें और बिना पीछे देखे आ जायें। अपने निवास में प्रवेश से पहले हाथ-पैर अवश्य धोयें और प्रवेश कर माँ लक्ष्मी को प्रणाम करें। अगले दिन आप 21 गोमती चक्रों को एक चांदी की डिब्बी में केशर व सिन्दूर के साथ रख कर उस लाल वस्त्र में ही चांदी की डिब्बी को बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। कुछ ही दिनों में आपको चमत्कार का अनुभव होगा, यह मेरा विश्वास है।
3. दीपावली की रात्रि में आप 21 हल्दी से रंगी अभिमंत्रित धनकारक कौड़ियां, तीन हल्दी की गांठ एवं एक केशर की डिब्बी को पीले वस्त्र में रख कर केशर व हल्दी से तिलक करें। दीपावली पूजन के साथ ही इनका भी पूजन करें। अगले दिन उस पीले वस्त्र में ही सारी सामग्री को बांध कर धन रखने के स्थान पर रख दें। इस उपाय से आपकी आय में वृद्धि के साथ ही आपके निवास तथा व्यवसाय में आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी।
4. यदि आप बहुत अधिक मेहनत करते हैं और आय भी अच्छी है परन्तु आप धन संचय करने में असमर्थ हैं तो दीपावली पर यह उपाय अवश्य करें। दीपावली की रात्रि में लक्ष्मी जी के पूजन वाले स्थान के पास एक बाजोट रखें और उस पर सवा मीटर रेशमी वस्त्र चार तह करके बिछायें। उस पर एक अभिमंत्रित हत्थाजोड़ी रखें और सिन्दूर से तिलक कर दीपावली पूजन करें। अगले दिन आप हत्थाजोड़ी को उसी लाल रेशमी वस्त्र में रखें और साथ में थोड़ा सिन्दूर, 21 लौंग, एक जोड़ा हरी इलायची व कुछ कर्पूर भी रख दें। इन सभी को उसी लाल वस्त्र में बांध कर अपनी तिजोरी अथवा व्यवसाय स्थान के गल्ले में रख दें। अब इसके प्रभाव से आपकी आय में तो वृद्धि होगी ही साथ ही आप स्वयं को धनसंचय करने में समर्थ पायेंगे।
5. यदि आप पर किसी भी प्रकार का आर्थिक संकट है तो दीपावली पर अपने निवास के मुख्यद्वार पर एक वन्दनवार टांगें। इस वन्दनवार में पांच गुच्छों का उपयोग करें। प्रत्येक गुच्छे में एक-एक पत्ता अशोक, आम, वट, नीम एवं पीपल का लें। वन्दनवार टांगते समय मानसिक रूप से माँ लक्ष्मी से अपने आर्थिक संकट को दूर करने का निवेदन करते रहें। दीपावली के बाद आप 11 गुरुवार को वन्दनवार बदलते रहें अर्थात् दीपावली को जो वन्दनवार आपने टांगी थी उस वन्दनवार को गुरुवार को हटा कर नई वन्दनवार टांगें। इस प्रकार आपको 11 गुरुवार को बन्दनवार बदलनी है। वैसे तो यह प्रयोग 11 सप्ताह का है किन्तु आपको इसका प्रभाव पहले ही दिखाई देने लगेगा।
6. दीपावली के दिन आप अंधकार होने से पहले पांच पीपल के पत्ते लाकर गंगाजल से धोकर पूजा सामग्री के साथ रखें। रात्रि में पूजन के समय पांचों पत्तों पर हल्दी व केशर में गंगाजल मिश्रित कर स्वस्तिक का चिन्ह बना कर पूजन करें। अगले दिन पांचों पत्तों को एक पीले वस्त्र रख कर धन रखने के स्थान रखें। इस उपाय के प्रभाव से यदि आप अपना व्यवसाय करते हैं तो आय में वृद्धि होगी और यदि नौकरी में हैं तो व्यर्थ के खर्चे समाप्त होंगे। यह उपाय आपको छोटा अवश्य लगेगा परन्तु अत्यन्त प्रभावी है। इस का फल आप स्वयं ही अनुभव करेंगे। इस उपाय के प्रभाव से आपकी आर्थिक समस्यायें दूर होने लगेंगी।
7. यह उपाय अत्यन्त प्रभावी है। मेरा अनुभव है कि जिसने भी यह उपाय किया है, उस पर माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रही है। यह उपाय आपको धनतेरस से आरम्भ करना है। इसके लिये धनतेरस के सांध्यकाल में स्नान कर लाल वस्त्र धारण पर तथा एक जटा नारियल पर करें निवास के पूजा स्थल पर ही एक लघु नारियल अलग-अलग कलावा लपेटें व दोनों पर केशर से तिलक करें। लघु नारियल एवं जटा नारियल व एक लाल चुनरी हाथ में लेकर माँ लक्ष्मी तथा धन के देवता कुबेर कर उनसे अपनी आर्थिक सम्पन्नता के लिये निवेदन करें।
इसके पश्चात् दोनों नारियल को सवा मीटर लाल नये वस्त्र पर रख कर उस पर रोली से पुनः तिलक करें। श्री लक्ष्मी का एकाक्षरी मंत्र श्री रोली से लिखें। इसके बाद आप धूप-दीप अर्पित करें। तथा एक लाल गुलाब माँ के चरणों से स्पर्श करवा कर दोनों नारियल के साथ रखें। एक माला श्रीं ह्रीं श्रीं का जाप करें व हाथ जोड़ कर पूजा स्थल से बाहर आ जाये। अगले दिन सांध्यकाल में ही किसी भी माँ शक्ति के मन्दिर में अथवा श्री लक्ष्मी नारायण के मन्दिर में जाकर पूजा अर्चना कर पिछले दिन की लाल चुनरी व एक नया जटा नारियल मन्दिर में अर्पित करें अर्थात् चुनरी तो माता को औड़ा दें तथा जटा नारियल को मन्दिर में ही फोड़ दें।
अब मन्दिर से ही एक लाल गुलाब का पुष्प लेकर निवास पर आयें। उस पुष्प को दोनों नारियल के साथ ही रख कर पुनः एकाक्षरी मंत्र की एक माला का जाप करें। अगले दिन आप केवल एक नया जटा नारियल मन्दिर में अर्पित कर एक गुलाब का पुष्प लाकर दोनों नारियल के साथ रख दें। दीपावली की रात्रि में पूजा के बाद पुनः ग्यारह माला ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये, प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः ॐ का जाप कर आर्थिक सम्पन्नता का निवेदन करें।
तत्पश्चात् दोनों नारियल व सभी पुष्पों को उसी लाल कपड़े में लपेट लें। इसके बाद एक जटा नारियल को ले जाकर दीपावली को ही अथवा अगले दिन पुनः उसी मन्दिर में अर्पित कर फोड़ दें और प्रणाम कर निवास पर आ जायें। लाल वस्त्र को लघु नारियल सहित पोटली का रूप देकर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। इस उपाय के बाद आप स्वयं ही परिवर्तन अनुभव करेंगे। का स्मरण तथा
8. यह भी अत्यन्त शक्तिशाली उपाय है। यदि आपने यह उपाय दीपावली की रात्रि में कर लिया तो आप फिर कभी आर्थिक समस्या में नहीं आयेंगे। धनतेरस पर आप इस बार थोड़ी सी चांदी खरीद कर उस चांदी का अपने सामने सुनार से अपनी अनामिका का बिना जोड़ का एक छल्ला बनवायें। जब धनतेरस का पूजन करें तो छल्ले को शहद व केशर में डुबोकर निवास के पूजा स्थल में ही रख दें।
दीपावली की रात्रि में पूजन के समय उस छल्ले का भी पूजन करें। मध्यरात्रि को छल्ले को निकाल कर एक घी के दीपक में डालकर दीपक जलायें और फिर माँ लक्ष्मी की तस्वीर के सामने लाल आसन पर बैठकर कमलगट्टे की माला से श्रीं श्रिययै नमः का 5 माला जाप करें और जाप के बाद प्रणाम कर उठ जायें। अगले दिन स्नान कर माँ लक्ष्मी को प्रणाम कर दीपक में से छल्ले को निकाल कर माँ के चरणों से स्पर्श करवा कर अपनी अनामिका में धारण कर लें।
