दीपावली पर किये जाने वाले धन प्राप्ति के उपाय
माँ लक्ष्मी को धन की देवी माना गया है। इसलिये सम्पूर्ण देश में लक्ष्मी जी के उपासक और साधक सर्वाधिक संख्या में हैं। जिस व्यक्ति को धन सम्बन्धी किसी मनोकामना को पूरा करना होता है अथवा उसे धन सम्बन्धी कोई समस्या परेशान कर रही होती है तो वह लक्ष्मी जी की ही साधना करता है। इसलिये लक्ष्मी साधना तो आप कभी भी कर सकते हैं किन्तु वास्तविक रूप से लक्ष्मी साधना का श्रेष्ठ समय दीपावली को माना गया है। हमारे यहां वैसे तो किसी भी देव अथवा देवी की वर्ष भर में कभी भी विशेष साधना अथवा पूजा की जा सकती है किन्तु इन सभी के विशेष दिवस माने गये हैं।
उन दिवसों को की गई पूजा-साधना का फल त्वरित रूप से प्राप्त होता है जैसे श्रीकृष्ण के लिये कृष्ण जन्माष्टिमी, गणेशजी के लिये गणेश चतुर्थी विशेष दिवस माने गये हैं। इसी प्रकार से लक्ष्मी जी की साधना के लिये दीपावली को विशेष दिवस माना गया है। यही कारण है कि दीपावली को सभी व्यक्ति लक्ष्मी जी से अधिकाधिक धन देने की प्रार्थना करते हैं। इस दिन की गई पूजा से लक्ष्मी जी शीघ्र प्रसन्न होकर साधक की मनोकामना पूरी कर देती हैं।
प्रत्येक दीपावली पर अधिकाधिक व्यक्ति लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त कर लेना चाहते हैं ताकि धन सम्बन्धी कोई समस्या नहीं आये। मैं यहां पर आपको लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने तथा उनकी कृपा प्राप्त करने के कुछ उपायों के बारे में बता रहा हूं। दीपावली पर लक्ष्मी जी का पूजन करने के साथ-साथ यह उपाय भी पूरी श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास के साथ कर लेंगे तो मैं मानता हूं कि लक्ष्मी जी की कृपा आप पर अवश्य ही होगी। यहां मेरा आप सभी से केवल यही कहना है कि उपाय कोई छोटा हो अथवा बड़ा, जब आप पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं तो उसका फल आपको अवश्य ही मिलता है। मैं आगे जो उपाय बता रहा हूं, उनमें से जो आप कर सकते हैं, अवश्य करें, मेरा विश्वास है कि लक्ष्मी जी की कृपा आपको शीघ्र ही प्राप्त होगी
1. दीपावली पूजन के समय यदि आप अपनी पत्नी को कोई लाल वस्त्र उपहार में देंगे तो आप पर माँ लक्ष्मी की स्थाई कृपा अवश्य ही होगी।
दीपावली पूजन में आप कभी भी तिलक आदि में चावलों का प्रयोग न करें।
आप जब दीपावली पूजन कर रहें हों तो अलग से एक थाली में रोली व केशर मिला कर थाली मध्य एक स्वस्तिक का चिन्ह बनायें। उसके मध्य एक बड़ा मिट्टी का दीपक रखें जिसमें शुद्ध घी इतनी मात्रा में हो कि कम से कम दीपक दो घण्टे अवश्य ही प्रज्ज्वलित रहे। ध्यान रखें, अभी आपको दीपक का कुछ नहीं करना है, बस पूजा स्थल में रखे रहने देना है। अब आप दीपावली का पूजन करें। मध्यरात्रि में अपने निवास के मध्य में गोबर से लीप कर एक छोटी सी मटकी रखें। उसमें एक चांदी का सिक्का रख कर उसके ऊपर सवा मीटर लाल रेशमी वस्त्र रख कर उस पर वह थाली रखें।
फिर माँ लक्ष्मी का स्मरण करते हुये दीपक प्रज्ज्वलित करें। मानसिक रूप से माँ लक्ष्मी का स्मरण करते हुये निवास में आमंत्रित करें और फिर प्रणाम कर आ जायें। अब अगले दिन प्रातः स्नान कर आप सारी सामग्री उठा लें। थाली में थोड़ा सा गंगाजल डालकर स्वस्तिक चिन्ह को साफ करें। थाली का जल मटकी में डाल कर सामान्य जल से मटकी को पूरा भर दें। इस मटकी को अपने ईशान कोण स्थान दे दें। चांदी का सिक्का मटकी में ही रखा रहने दें। लाल रंग के वस्त्र में कुछ नगद धन अथवा कोई स्वर्ण सामग्री रख कर बांधें और अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। इस उपाय से आप स्वयं माँ लक्ष्मी की कृपा अनुभव करेंगे। प्रयोग
2. यह उपाय भी आप दीपावली की रात्रि में करें। इस उपाय में आपको पांच • अभिमंत्रित धनकारक कौड़ियां एवं पांच अभिमंत्रित गोमती चक्र, एक चांदी का सिक्का एवं एक लघु नारियल की आवश्यकता होगी। इस सारी सामग्री को एकत्र कर दीपावली पूजन के समय रोली से तिलक करें और पूजन करें। अब आप अगले दिन प्रातः स्नान कर एक-एक गोमती चक्र एवं धनकारक कौड़ी को अपने निवास के चारों कोनों में अन्दर की ओर दीवार अथवा भूमि में दबा दें। एक लाल रेशमी वस्त्र में बची कौड़ी एवं गोमती चक्र के साथ लघु नारियल एवं चांदी का सिक्का रख कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। इस उपाय से वर्षपर्यन्त आपके निवास में माँ लक्ष्मी का स्थाई वास रहेगा।
3. धनतेरस पर आप एक अभिमंत्रित कुबेर यंत्र की व्यवस्था करें। सांध्यकाल पूजा के स्थान के पास यह प्रयोग करना है। पूजा स्थल के पास के स्थान को में गंगाजल से धोकर स्वच्छ कर लें। इस स्थान पर एक बाजोट रखें और इसके सामने लाल आसन पर बैठ जायें। बाजोट पर सवा मीटर लाल वस्त्र चार तह करके बिछायें और उसके ऊपर 11 कमलगट्टे के बीज रखें। इन बीजों के ऊपर यंत्र को स्थान दें। यंत्र को केशर से तिलक करें। शुद्ध घी का दीपक व धूप-अगरबत्ती के साथ कोई पीला भोग अर्पित करें और अपने निवास में माँ लक्ष्मी के साथ स्थाईवास करने का निवेदन करें। अब आप यंत्र के समक्ष ही लाल रंग के आसन पर बैठ कर हल्दी की माला से 5 माला निम्न मंत्र का जाप करें।
मंत्र- श्री कुबेराय नमः धनधान्यदिपत्यै नमोस्तुते ।
जाप के बाद प्रणाम कर उठ जायें। अब अगले दिन भी यही क्रिया करें। इस प्रकार से दीपावली तक यह क्रिया करते रहें। दीपावली की रात्रि में एक अभिमंत्रित श्रीयंत्र को भी 11 कमलगट्टे के बीजों पर स्थान देकर रोली से तिलक-बिन्दी करें और दीपावली पूजन करें। पूजन के बाद मध्यरात्रि में जब सब सो जायें तो आप पुनः स्नान कर लाल वस्त्र धारण करके पूजा स्थान पर आसन पर बैठें। अब पहले 11 बार लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। स्तोत्र के बाद कमलगट्टे की माला से 11 माला श्रीं ह्रीं श्रीं श्रीहरिप्रिये श्री कुबेराय नमो नमः का जाप करें। जाप के बाद प्रणाम कर उठ जायें और एक शुद्ध घी का दीपक प्रज्ज्वलित कर अपने निवास के मुख्यद्वार पर रख दें। अगले दिन से आपको पांच दिन तक उपरोक्त मंत्र का जाप करना है। धनतेरस से दीपावली तक और फिर दीपावली से इन पांच दिन तक आपके निवास में माँ लक्ष्मी के साथ धनदेवता श्री कुबेर का भी वास होगा,
4. दीपावली पूजन से पहले आप 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र, इतनी ही धनकारक कौड़ियां, तीन लघु नारियल, 11 कमलगट्टे के बीज, एक अभिमंत्रित श्रीयंत्र, एक केशर की डिब्बी, सवा मीटर लाल रेशमी वस्त्र, पांच चांदी के सिक्के की व्यवस्था करके पूजा स्थल में रख दें। अब आप दीपावली पूजन के समय एक बाजोट पर लाल रेशमी वस्त्र को चार तरह करके बिछायें। उस पर लक्ष्मी जी की तस्वीर को स्थान देकर कमलगट्टे के बीज रखें। उन बीजों पर श्रीयंत्र को स्थान दें। यंत्र के समक्ष बाकी की सारी सामग्री रख दें। अब आप दीपावली पूजन करें और कोई भी माँ लक्ष्मी का पाठ करें। पाठ के बाद आप 1001 बार श्रीं का जाप करें। जाप के बाद प्रणाम कर उठ जायें। अगले दिन आप यंत्र सहित सारी सामग्री को लाल वस्त्र में रख कर एक पोटली का रूप देकर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें और उसी दिन से लगातार 21 दिन तक सांध्यकाल में तीन अगरबत्ती को धन के स्थान पर रखी पोटली पर 21 बार श्रीं का उच्चारण करते हुये अर्पित करें। इस उपाय से एक वर्ष तक आपके निवास में माँ लक्ष्मी की स्थाई कृपा बनी रहेगी, ये मेरा अनुभव एवं विश्वास है।
5. दीपावली की रात्रि में आप 21 बार दारिद्रयदहन शिवस्तोत्र एवं 21 बार ही श्री लक्ष्मीअष्टक का पाठ करना आरम्भ करें। अब आप अगले दिन से नियमित 21 दिन तक दोनों ही पाठ एक-एक बार करें। 21 दिन के बाद यदि आप नियमित पाठ करना चाहें तो कर सकते हैं और यदि समयाभाव है तो प्रत्येक सोमवार को दारिद्रयदहन शिवस्तोत्र (स्तोत्र के लिये निरोगी दुनिया प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मेरी पुस्तक कुछ मोती कुछ सीप का अध्ययन करें) का पाठ एवं शुक्रवार को श्री लक्ष्मी अष्टक का पाठ करते रहें। यह मेरा स्वयं का अनुभव है कि जिसने भी यह उपाय किया है, उसके निवास एवं व्यवसाय स्थल से दरिद्रता स्थाई रूप से गायब हो गई है। इसलिये मेरी आपको भी यही सलाह है कि दीपावली पर यह उपाय अवश्य करें।
दीपावली पर किये जाने वाले धन प्राप्ति के उपाय -2
