kahani ! kahaniyan ! hindi kahani अजेय होना यानी दुर्गुणों को जीत लेना
सफलता की चाहत किसे नहीं होती? सभी कामयाब होना चाहते हैं।
यदि आप भी इस यात्रा पर निकले हों तो सफलता के साथ अजेय होने की तैयारी भी रखिए। अजेय होना और सफल होना, दोनों में फर्क है। सफलता बाहरी स्थितियों पर नियंत्रण पाकर, अपनी योग्यता का उपयोग-दुरुपयोग करते हुए भौतिक जगत में दूसरों से आगे निकलकर प्राप्त की जाती है। आज की दुनिया में सफलता का यही मापदंड है कि आप दूसरों से आगे हों। लेकिन अजेय होने का मतलब है अपने भीतर के दुर्गुणों को भी जीत लेना। कई लोग बाहर तो सफल हो जाते हैं पर भीतर अपने ही दुर्गुणों से हार जाते हैं। और इसीलिए ऐसे लोग भविष्य में असफलता का भय पालकर बैठ जाते हैं। यहीं से जीवन में चिंता उतरती है। चिंता लंबे समय टिक जाए तो शरीर को बीमारी दे जाती है और मन सक्रिय होकर अवसाद में पटकता है। अब तो लोग डिप्रेशन को बीमारी भी नहीं मानते। उदास मन से काम करते हैं, डिप्रेशन में डूबने के बाद भी लगे रहते हैं। लेकिन इसका खतरा यह है कि जिस दिन मन हावी हो जाता है उस दिन आदमी आत्महत्या तक कर लेता है। अजेय होने का मतलब है अपने भीतर की इंद्रियों पर भी विजय प्राप्त कर लेना। अजेय व्यक्ति भविष्य का भय नहीं पालता। वह जानता है मैं केवल बाहरी ताकतों से ही नहीं जीता हूं। मेरे पास आत्मबल है। जब कभी संघर्ष की नौबत आएगी, मुझे कोई इसलिए नहीं हरा पाएगा, क्योंकि मैंने अपने दुर्गुणों को जीत लिया है। इसलिए सफल अवश्य हों पर अजेय भी रहें।