राशि के आधार पर लाभ प्राप्ति के टोटके

 राशि के आधार पर लाभ प्राप्ति के टोटके 


इस अध्याय में आपको कुछ ऐसे सफल सूत्र बता रहा हूं जिनको आप अपने जीवन में अपना कर अपने व्यवसाय में पूर्णतः सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर मैं निम्न सूत्रों को जातक की राशि के आधार पर बता रहा हूं जिससे किसी भी प्रकार का कोई अवरोध अथवा समस्याय नहीं आये। प्रत्येक राशि का जातक अपनी राशि के आधार पर निम्न उपायों को करके अपने व्यवसाय में सफलता प्राप्त कर सकते हैं


मेष- मेष राशि के स्वामी श्री मंगलदेव होते हैं। मेष राशि वाले जातक यदि अपने व्यवसाय में निम्न उपाय करेंगे तो अवश्य ही उनको अपने व्यवसाय में पूर्णतः सफलता प्राप्त होगी, ऐसा मेरा विश्वास है। आप अपने कार्यालय में प्रयास करें कि पीने का जल किसी मिट्टी अथवा तांबे के पात्र में रखें। यदि आप कर्मचारी वर्ग का जल इन पात्रों में नहीं रख सकते हैं तो कम से कम अपने प्रयोग करने का जल इन पात्रों से किसी भी पात्र में अवश्य रखें। आप जब भी अपने व्यवसाय स्थल पर आयें तो अपने निवास से गुड़ अथवा जल का सेवन करके ही निकलें। वर्ष में एक बार व्यवसाय स्थल में श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ अवश्य करवायें। अपने महत्त्वपूर्ण निर्णय सोमवार, मंगलवार अथवा गुरुवार को करें। व्यवसाय स्थल पर लाल रंग के शेड के रंगों का प्रयोग अधिक करें। व्यवसाय स्थल के पूजाघर में श्री हनुमानजी की तस्वीर को स्थान अवश्य दें।


वृषभ- निम्न उपायों से यदि कुछ उपाय भी वृषभ राशि वाले अपने जीवन में अपनाते हैं तो अवश्य ही उनको व्यवसाय में सफलता प्राप्त होगी। ये जातक अपने व्यवसाय स्थल की डेकोरेशन चमकीले रंगों के साथ हल्के रंगों का प्रयोग करें। जातक को नित्य ही अथवा कम से कम शुक्रवार को तीव्र सुगंध के श्वेत पुष्पों से अपने आराध्य की पूजा करनी चाहिये। पूजा स्थल में माँ लक्ष्मी के साथ अभिमंत्रित श्रीयंत्र को स्थान देना चाहिये। यदि संभव हो तो अपने कार्यालय में पूर्व अथवा उत्तर दिशा में मछलीघर रखें। जिस स्थान पर कर्मचारी बैठते हों, उसकी उत्तर दिशा में एक शीशा लगाना चाहिये। वृष राशि वालों को अपनी अलमारी में कोई इत्र आदि रखना चाहिये तथा स्वयं भी उस इत्र का प्रयोग करना चाहिये। जिस स्थान पर आपका कोई विशेष कर्मचारी बैठे तो उसकी मेज पर नैऋत्य दिशा में एक स्फिटिक का ग्लोब रखें। इसके साथ 6 माह में कम से कम एक बार श्रीसूक्त अथवा श्री लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ अवश्य करवाना चाहिये। माह में एक बार 9 वर्ष से कम आयु की कन्याओं को अपने निवास पर साबूदाने की खीर खिलानी चाहिये। व्यवसाय स्थल अथवा निवास के निकट जो भी मन्दिर हो, उसमें अगरबत्ती का दान करते रहना चाहिये। मिथुन- मिथुन राशि के स्वामी सौरमण्डल के युवराज बुध होते


हैं। यह राशि कुछ व्यवसाय से प्रत्यक्ष सम्बन्ध रखती है। मिथुन राशि वालों को यथासम्भव निम्न उपाय करने चाहिये जिससे वह अपने व्यवसाय में सफलता प्राप्त कर सकें। व्यवसाय स्थल में कभी भी चौड़े पत्ते वाले पौधे नहीं रखने चाहिये। जब भी हिजड़े मिलें, उनको नगद धन देना चाहिये। जब भी कोई व्यवसाय से सम्बन्धित गम्भीर निर्णय लेना हो अथवा कोई टेण्डर भरना हो तो प्रयास करें कि निर्णय से पहले किसी एक हिजड़े को हरे वस्त्रों का दान करें अथवा गाय को हरी सब्जी अथवा घास खिलायें । जातक को अपने कार्यालय में हरे-भरे पौधे एवं पुष्प रखने चाहिये चाहे वह नकली ही क्यों न हो। • अपने कार्यालय में सामने की दीवार पर एक बड़ी घडी लगानी चाहिये। यह ध्यान रखें कि वह बन्द न हो। अगर किसी कारण से घडी बंद हो जाये तो उसे तुरन्त चालू कर पर दें। अगर घड़ी बार-बार बंद होती हो तो उसे बदल कर नई लगायें। व्यवसाय स्थल के पूजाघर में श्री गणेशजी एवं माँ दुर्गा की तस्वीर लगानी चाहिये। सम्भव होने श्री गणेश अथर्वशीर्ष एवं श्री दुर्गा चालीसा के साथ श्री सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना चाहिये। भोग में मोदक एवं ऋतु फल अर्पित करना चाहिये।


कर्क– कर्क राशि के स्वामी चन्द्रदेव होते हैं। जिन जातकों की कर्क राशि होती है उनको अपने व्यवसाय में विशेष ध्यान देना चाहिये क्योंकि ऐसे जातक अत्यन्त कोमल हृदयी होते हैं। इस कोमल स्वभाव के कारण उनको अपने व्यवसाय में कई बार हानि उठानी पड़ती है। इसलिये ऐसे जातकों से मेरा निवेदन है कि उन्हें अपने सम्बन्धों का विशेष ध्यान रखना चाहिये परन्तु व्यवसाय में अपने लाभ के लिये सम्बन्धों को अलग करना पड़ता है। यदि आप अपने व्यवसाय की अपेक्षा अपने सम्बन्धों को वरियता देंगे तो हानि उठानी होगी। उस हानि का प्रत्यक्ष प्रभाव आपके परिवार पर आयेगा। कर्क राशि वाले जातकों को अपने व्यवसाय स्थल के ईशान कोण में पूजा स्थल रखना चाहिये। पूजाघर में भगवान शंकर की परिवार सहित तस्वीर रखनी चाहिये। यदि आप किसी कारण से ईशान कोण में पूजाघर बनाने में असमर्थ हैं तो फिर आप ईशान कोण में एक मिट्टी की मटकी में जल भर कर रखें तथा उस जल में एक मोती एवं एक चांदी का सिक्का रखें। वर्ष में कम से कम एक बार अपने व्यवसाय के नाम से विधि-विधान से भगवान शंकर का अभिषेक करवाना चाहिये। व्यवसाय स्थल में हल्के चमकीले रंगों का प्रयोग करें।


सिंह- सिंह राशि के जातक कुछ तेज स्वभाव के होते हैं और अपने लाभ लिये सम्बन्धों को अलग कर देते हैं। सिंह राशि वाले जातकों को नित्य ही सूर्य देव को रोली मिश्रित जल का अर्ध्य देना चाहिये क्योंकि सिंह राशि के स्वामी सूर्यदेव ही होते हैं। सिंह राशि वाले जातकों को अपने कार्यालय में सदैव स्वच्छ एवं सुगंधित  वातावरण बनाये रखना चाहिये। स्वयं की बैठक कुछ इस प्रकार से रखनी चाहिये कि वह स्वयं तो बाहर से आने वाले को देख सकें परन्तु बाहर से आने वाला कोई व्यक्ति उनको नहीं देख सके। जातक को अपने कार्यालय में अधिकांश स्टील का फर्नीचर का उपयोग करना चाहिये। रविवार को गाय को गुड़, गेहूं एवं केले खिलाने चाहिये। मुख्यद्वार पर ऐसी तस्वीर लगानी चाहिये जिसमें एक महिला अपने दोनों हाथ जोड़ कर आगंतुकों का स्वागत कर रही होती है। सोमवार, मंगलवार एवं गुरुवार को कोई गम्भीर निर्णय लें तो आपके व्यवसाय के हित में रहेगा। व्यवसाय के पूजाघर में श्रीहरि विष्णु एवं माँ लक्ष्मी को स्थान अवश्य दें। अपने कार्यालय में प्रवेश के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करें तो अधिक लाभ होगा। 6 माह अथवा वर्ष में एक बार व्यवसाय स्थल पर श्रीहरिवंश पुराण का पाठ करवाना चाहिये।


कन्या- कन्या राशि के स्वामी भी सौरमण्डल के युवराज बुध होते हैं। कन्या राशि वाले जातकों को अपने व्यवसाय स्थल पर हल्के हरे एवं हल्के आसमानी रंगों का उपयोग करना चाहिये। कार्यालय का फर्नीचर लकड़ी का होना चाहिये। पूर्वी दीवार पर घड़ी लगानी चाहिये। घड़ी चलती रहनी चाहिये। इसलिये इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि घड़ी बंद नहीं हो। बंद घड़ी के कारण नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जो व्यवसाय में समस्यायें उत्पन्न करती है। कार्यालय का कोई भी बिजली का अथवा कोई इलैक्ट्रोनिक्स उपकरण खराब नहीं रहना चाहिये। खराब हो जाये तो तुरन्त ठीक करवा लेना चाहिये। कार्यालय के पूजाघर में श्री गणेश, माँ दुर्गा एवं माता लक्ष्मी की तस्वीर को स्थान दें। वर्ष में एक बार व्यवसाय स्थल पर माँ दुर्गा की कोई पूजा करवानी चाहिये। बुधवार को अथवा निवास से कार्यालय आते समय गाय को हरी घास अथवा कोई हरी सब्जी खिलानी चाहिये। अपने बैठने की कुर्सी पर यह ध्यान रखें कि उनमें पहिये न हों तो अच्छा है और यदि हो तो विषम संख्या में जैसे पांच अथवा सात की संख्या में पाये होने चाहिये। मोबाईल अथवा टेलीफोन को अपने बैठने की मेज पर दायें हाथ की ओर रखना चाहिये।


तुला- तुला राशि के स्वामी शुक्र होते हैं। तुला राशि वाले जातकों को अपने कार्यालय की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिये। पूजाघर को भी ईशान कोण में ही रखें तथा पूजाघर में श्री गणेश, माँ लक्ष्मी एवं भगवान शंकर एवं श्रीहरि विष्णु की तस्वीर को स्थान दें। तुला राशि वाले यह ध्यान रखें कि जिस स्थान पर वह बैठें, उसके पीछे कोई ठोस आधार होना चाहिये अर्थात् कोई दीवार आदि होनी चाहिये। दीपावली की रात्रि में एक अभिमंत्रित श्रीयंत्र का पूजन कर कमलगट्टे के 11 बीजों के साथ एक लाल वस्त्र में श्रीयंत्र को बांध कर कार्यालय की अलमारी में रखना चाहिये। कार्यालय में प्रातः पूजा करने पर तीव्र सुगंध की अगरबत्ती का प्रयोग करना चाहिये। वर्ष में एक बार व्यवसाय स्थल में श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र का विधि-विधान से पाठ अवश्य करवाना चाहिये। कार्यालय की साज-सज्जा में हल्के रंगों का प्रयोग करना चाहिये। यदि सम्भव हो तो व्यवसाय स्थल के निकट कोई पीपल वृक्ष हो तो प्रत्येक शनिवार को मीठे जल से वृक्ष का पूजन करना चाहिये। माह में कम से कम एक बार शनिवार को किसी भी हनुमान मन्दिर पर 5 गरीबों को सरसों के तेल से निर्मित कोई भी भोज्य सामग्री देनी चाहिये। जातक को कार्यालय आते समय इ आदि का प्रयोग करना चाहिये। योग


वृश्चिक- वृश्चिक राशि के स्वामी मंगलदेव होते हैं। इस राशि के जातक कुछ • तेज स्वभाव के परन्तु सयमी होते हैं। ये जातक यदि आपने व्यवसाय स्थल पर विशेष ध्यान दें तो अवश्य ही सफल होते हैं। इस राशि के जातक अपने कार्यालय एवं व्यवसाय स्थल के मुख्यद्वार पर अन्दर की ओर सिन्दूर से स्वस्तिक चिन्ह बनायें तथा बाहर की ओर श्री गणेशजी की प्रतिमा को स्थान दें। पूजाघर में श्री हनुमानजी की तस्वीर को स्थान देना चाहिये। प्रत्येक शनिवार एवं मंगलवार को प्रभु को सिन्दूर के तिलक अर्पित कर मंगलवार को शुद्ध घी का दीपक और शनिवार को चमेली के तेल का दीपक अर्पित करना चाहिये, साथ ही पीले अथवा लाल पुष्प (गुलाब के अतिरिक्त कोई भी) के साथ गुड़-चने का भोग अर्पित करें। जातक जब भी निवास से कार्यालय की ओर आये तो गुड़ अथवा जल का सेवन करके निकले। जातक यदि मंगलवार को कार्यालय आते समय किसी श्री हनुमानजी के मन्दिर में दर्शन कर उनके बायें पैर से सिन्दूर लेकर स्वयं के तिलक करे तो अत्यन्त लाभदायक होता है। माह में एक सोमवार में को तांबे के पात्र में जल भर उसमें कुछ साबुत नमक डाल कर रखें तथा अगले दिन मंगलवार को दिन के दो बजे से पहले वह जल व्यवसाय स्थल की दीवारों पर छिड़कें।


धनु- धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इस राशि के जातक अत्यन्त सौम्य स्वभाव के होते हैं और अपना व्यवसाय भी बहुत लगन से करते हैं। ऐसे जातकों को अपने व्यवसाय स्थल के धन रखने के स्थान पर सफेद चंदन की लकड़ी के साथ तीन हल्दी की गांठ व एक केशर की डिब्बी अवश्य रखनी चाहिये। व्यवसाय स्थल के पूजाघर में श्रीहरि विष्णु की तस्वीर को स्थान देना चाहिये। कार्यालय में कोई भी कार्य आरम्भ करने से पहले पूजा स्थल में धूप अथवा अगरबत्ती अर्पित करनी चाहिये। कार्यालय में हल्के पीले रंग का प्रयोग अधिक करना चाहिये। फर्नीचर अधिकांशतः लकड़ी का ही होना चाहिये। जातक यह भी ध्यान रखें कि वह अपने कार्यालय में जितने अन्दर की ओर अपने बैठने का स्थान बनायेंगे उतना ही उनके लिये शुभ होगा। पूजाघर को भी अपने सामने की दीवार पर ही रखना चाहिये। सम्भव होता कार्यालय आते समय गाय को एक रोटी दें। गुरुवार को पूजा स्थल में प्रभु व केशर से तिलक कर गौघृत का दीपक एवं पीले पुष्प अर्पित करने चाहिये। स्वयं की तस्वीर को हल्दी भी जब निवास से काम के लिये जायें तो केशर का सेवन करके ही निवास से पैर बाहर निकालना चाहिये। पूर्णिमा एवं गुरुपुष्य योग को निकट के किसी मन्दिर में दर्शन करके कार्यालय आना चाहिये।


मकर- मकर राशि के स्वामी शनिदेव है। मकर राशि के जातक अत्यन्त चालाक प्रकार के तथा लम्बे कद के होते है। ये जातक अपने व्यापार में सफलता प्राप्त करने के लिये कितनी भी मेहनत तथा किसी भी प्रकार का कोई भी कार्य करने में सक्षम होते हैं। ऐसे जातक को अपने कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को शनिवार को भोजन कराना चाहिये। शनिवार को पीपल का पूजन व्यापारिक सफलता में मुख्य भूमिका निभाता है। मकर राशि वाले जातकों को अपने कार्यालय में नीले रंग के चमकीले शेड का प्रयोग करना चाहिये। कोई भी मुख्य निर्णय लेने के लिये शुक्रवार का विशेष ध्यान देना चाहिये। व्यवसाय स्थल का मुख्यद्वार पश्चिम दिशा की ओर है तो फिर काले घोड़े की नाल अत्यधिक लाभदायक सिद्ध होगी। व्यवसाय का धन कहीं रुक रहा है तो प्रथम शनिवार को एक मिट्टी की मटकी ढक्कन सहित लाकर कार्यालय में रखें और बुधवार को बिना ढक्कन हटाये बहते जल में प्रवाहित कर दें। जिससे भी आपको व्यवसाय का धन लेना है, वह शीघ्र ही आपका धन वापिस कर देगा।


कुंभ- कुंभ राशि के स्वामी भी शनिदेव ही होते हैं। ऐसे जातक मन के अच्छे होते हैं परन्तु इनके मन की बात कोई नहीं जान सकता है। इस राशि के जातक अपने बैठने का ऐसा स्थान बनायें जहां से बाहर से कोई व्यक्ति इनको न देख सके। इनकी मेज के सामने कुछ भाग खुला होना चाहिये। जातक को अपने कार्यालय के डेकोरेशन में हल्का लाल, हल्का नीला एवं हल्के पीले रंग का प्रयोग करना चाहिये। कार्यालय पर शनिवार को यदि कोई भिखारी आता है तो उसे कभी भी खाली हाथ वापिस नहीं करना चाहिये। जब ये जातक नया व्यवसाय आरम्भ करें तो प्रथम शनिवार को एक मिट्टी की मटकी ढक्कन सहित लाये। ढक्कन पर काले तिल व लकड़ी का एक कोयले का टुकड़ा एवं एक लोहे की कील रख कर व्यवसाय स्थल में रखे। अगले शनिवार को वह मटकी बिना खोले किसी को दान कर दे। यदि कोई दान लेने वाला नहीं मिले तो मटकी को आदर सहित किसी पीपल वृक्ष के नीचे रख आना चाहिये। इसके बाद वर्ष में एक बार यह उपाय अवश्य करते रहें।


मीन- मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति होते हैं। ऐसे जातक अपने कार्यालय में हल्के पीले रंग का प्रयोग अवश्य करें। पूजा स्थल श्रीहरि विष्णु, माँ लक्ष्मी एवं माँ सरस्वती की तस्वीर को स्थान दें। ईशान कोण में जल से भरी मटकी रखें। मटकी का जल कभी सूखे नहीं, उसमें गुरुवार को जल बदलते रहें। गुरुवार को अपने व्यवसाय के नाम से भगवान दत्तात्रेय के मन्दिर में जाकर कुछ दान करें। गाय को आटे के पेड़े एवं गुड़ खिलाना चाहिये। जब कार्यालय आयें तो केशर का सेवन करें। माह में एक बार प्रथम बुधवार को बेसन के तीन लडू लाकर पूजा स्थल में रख दें तथा अगले दिन वह लड्डू गाय को खिला दें। गुरुवार को कोई भी एक पीला फल लकर पूजा स्थल में रखें। अगले दिन फल वृद्ध भिखारी को दे दें।



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