लक्ष्मी माता जी की कृपा प्राप्त करने के उपाय

लक्ष्मी माता जी की कृपा प्राप्त करने के उपाय


आज ऐसा एक भी व्यक्ति नहीं होगा जिसे लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी। लक्ष्मी कृपा का मतलब है धन प्राप्ति करना और आज ऐसा कोई भी नहीं होगा जिसे अधिकाधिक धन प्राप्त करने की कामना न हो। इसके लिये प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्म, चाहे वह स्वयं का व्यवसाय हो अथवा नौकरी हो, वह सब करने के साथ-साथ लक्ष्मी की साधना और पूजा भी करता है। इसके पश्चात भी उसे हमेशा धन की कमी सताती रहती है।


इस स्थिति में वह व्यक्ति अवश्य ही इस बारे में सोचता होगा कि आखिर लक्ष्मी जी उससे क्यों नाराज हैं? यहां मैं उन स्थितियों के बारे में बता रहा हूं जिनके कारण लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है। अगर आप भी लक्ष्मी कृपा से वंचित हैं तो इस अध्याय में जो कारण बताये जा रहे हैं, उन पर विचार करके देखें कि क्या वह आप पर लागू होते हैं ? वे कारण आगे बताये जा रहे हैं। आप पूरी ईमानदारी से अपना मूल्यांकन करें कि इन कारणों में से ऐसे कौन से कारण हैं जो आपके साथ जुड़े हैं ? अगर आप कारण ज्ञात कर लेते हैं तो उन्हें दूर करने का तत्काल प्रयास करें


आमतौर पर व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ ठीक से व्यवहार नहीं करता है। ऐसा सभी तो नहीं करते हैं किन्तु फिर भी अनेक व्यक्ति तो ऐसा करते ही हैं। कुछ व्यक्ति तो अपनी पत्नी को डांटते-डपटने के अलावा कभी-कभी मार-पीट तक कर डालते हैं। इस बारे में मेरा यह कहना है कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं करता है, उसे प्रताड़ित करता है, ऐसे घर में लक्ष्मी जी की कृपा नहीं होती है। इसके पीछे कुछ ठोस कारण भी हैं जिनके बारे में भी मैं बता रहा हूं ताकि आप इस विषय को ठीक से समझ सकें।


परिवार में आर्थिक समस्यायें नहीं हों, इसके लिये आवश्यक है कि आप अपनी पत्नी का सम्मान करें। आपकी पत्नी प्रसन्न रहेगी तो लक्ष्मी जी भी अपने-आप प्रसन्न हो जायेंगी और उनकी कृपा भी आपको प्राप्त होगी। यहां पर कुछ पाठक सम्भवतः यह जानना चाहेंगे कि पत्नी को प्रसन्न करने से आर्थिक समस्याओं में कैसे कमी आयेगी ? इसमे मैं यहां पर स्पष्ट करने का प्रयास कर रहा हूं। एक पत्नी में ही ऐसी क्षमता होती है कि वह कम संसाधनों में भी घर को ठीक प्रकार से चला लेती है। यह सम्भवतः लक्ष्मी जी के प्रभाव के कारण ही सम्भव होता होगा अन्यथा उन्हीं संसाधनों में एक पुरुष घर को चलाये कभी सफल नहीं होता है।


इसके बारे में आपको विस्तार से बताने का प्रयास कर रहा हूं। यह जो विचार बता रहा हूं वह मेरे व्यक्तिगत हैं लेकिन अगर आप इन विचारों को वास्तविकता से मिलायेंगे, आज की स्थिति से तुलना करेंगे तो इसे सही पायेंगे। लक्ष्मी जी के ऊपर समस्त सृटि को सही प्रकार से चलाने का दायित्व था। इस कारण से लक्ष्मी जी का अधिकांश समय पृथ्वी पर ही व्यतीत होता था। इससे स्वर्गलोक में उनकी कमी अखरने लगी थी। सब देवताओं ने लक्ष्मी जी से प्रार्थना की कि वे पृथ्वीलोक पर ऐसी व्यवस्था कर दें जिससे पृथ्वी भी ठीक प्रकार से चलती रहे और उन्हें भी अधिक समय यहां बिताना नहीं पड़े। सबके आग्रह पर लक्ष्मी जी ने विचार किया और फिर उनके निवेदन को स्वीकार करते हुये एक व्यवस्था कर दी।


 समस्त सृष्टि को छोटा रूप देकर उसे परिवार में बदल दिया। अपना एक प्रतिरूप बनाकर उसे पत्नी का पद प्रदान करके उसे घर को चलाने की जिम्मेदारियां सौंप दी। तब पृथ्वोलोक से जाने से पूर्व लक्ष्मी ने पत्नी को आश्वस्त किया कि विवाह होते ही जब एक स्त्री पत्नी के रूप में ससुराल में प्रवेश करेगी तो उसे मेरे जैसा ही सम्मान प्राप्त होगा। उसे गृहलक्ष्मी के नाम से पुकारा जायेगा। उसे परेशान करने वालों पर वे कभी अपनी कृपा नहीं करेंगी और उसे सम्मान देने वाली की समस्त कामनाओं की पूर्ति वे अवश्य करेंगी। इसके बाद लक्ष्मी जी स्वर्गलोक को चली गईं। तब से आज तक यही व्यवस्था बनी हुई है और आप सभी इसे प्रत्यक्ष देखकर अनुभव भी अवश्य करते होंगे।


पति-पत्नी के बीच किसी प्रकार का तनाव और कलह नहीं होने से घर का सारा वातावरण सुखद बन जाता है और ऐसे वातावरण में अगर कोई समस्या आती है तो उसे भी हंस कर झेल लिया जाता है। समस्या कब आयी और कब चली गयी, इसका भी पता नहीं चलता है। इसके बाद तो वहां पर लक्ष्मी जी की कृपा ही होने लगती है। इसके विपरीत आप देखें कि जहां पति-पत्नी के बीच कलह और तनाव रहता है, वहां खुशी के पल भी उतना सुख नहीं दे पाते जितना कि प्राप्त होना चाहिये था। ऐसे वातावरण में अगर कोई समस्या आती है तो वह वहीं पर पांव पसार कर बैठ जाती है।


 पूरा घर अनेक प्रकार की समस्याओं तथा परेशानियों से भरा रहता है, वहां लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त नहीं होती है। इसे कोई भी व्यक्ति हल्के से न ले और गम्भीरता से इस विषय के बारे में सोच-विचार करे। अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ गलत व्यवहार करता है, उसे किसी भी कारण को लेकर सताता है तो उनसे मेरा निवेदन है कि वे ऐसा व्यवहार बंद कर पत्नी को सम्मान से घर में स्थान दें अन्यथा आज नहीं तो आने वाले समय में अवश्य ही ऐसे लोगों को लक्ष्मी जी के कोप का शिकार बनना पड़ सकता है।


इस बारे में विद्वानों का भी यह विश्वास है कि जिसने अपनी पत्नी को मान-सम्मान दिया उसे लक्ष्मी की साधना करने की भी आवश्यकता नहीं है, लक्ष्मी जी स्वयं ही वहां किसी बात की कमी नहीं रहने देती हैं। इसलिये सभी व्यक्तियों को यह प्रयास करना होगा कि वे अपनी पत्नी को परिवार में पूरा मान-सम्मान दे और कर भी उसका अपमान नहीं करें और न उसे पीड़ा पहुंचाये। यहां पर में ऐसे कुछ विशेष सूत्र भी बताना चाहूंगा जिससे आप अपनी पत्नी को प्रसन्न रख सकते हैं। मैं चाहूंगा कि इन सूत्रों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें और अगर आप ऐसा नहीं करना चाहते हैं तो इन पर थोड़ा विचार अवश्य करें। सूत्र इस प्रकार हैं भूल


> पत्नी घर को अच्छी प्रकार से व्यवस्थित कर सकती है। यह गुण उसम जन्म से ही होता है किन्तु इस गुण का प्रकटीकरण विवाह के बाद होता है, जब वह स्वयं अपना घर संभालती है। इसी कारण से ही उसे गृहलक्ष्मी माना गया है। आपके लिये यह अच्छा होगा कि घर की सारी व्यवस्था पत्नी को सौंप दें। जैसे पत्नी घर चलाना चाहती है, वैसे ही चलाने दें, उसके काम में हस्तक्षेप कभी नहीं करें। ऐसे में पत्नी भी प्रफुल्लित मन से घर को सम्भालेगी और कभी किसी प्रकार की कमी नहीं आने देगी। लक्ष्मी जी भी अपने प्रतिरूप पत्नी को कभी समस्या में लाना नहीं चाहेंगी, इसलिये लक्ष्मी जी की कृपा उस घर में अपने आप ही होगी। आप स्वयं सोचें कि जहां स्वयं लक्ष्मी जी की कृपा हो, वहां किसी भी प्रकार का अभाव अथवा समस्या कैसे रह सकते हैं ?


> घर में अगर कोई भी बड़ा काम हो तो इसमें पत्नी को प्राथमिकता दें। अनेक घरों में मैंने देखा है कि ऐसे अवसरों में पत्नी की पूरी तरह से उपेक्षा कर दी जाती है। ऐसे व्यवहार से आहत पत्नी कुछ कह तो नहीं पाती किन्तु भीतर ही भीतर स्वयं को आहत हुआ समझने लगती है। इसलिये घर अथवा रिश्तेदारी में जहां भी कभी कोई काम पड़े, वहां अपनी पत्नी को हमेशा आगे रखें। इसमें किसी प्रकार का संशय मन में नहीं लायें। इसका एक उदाहरण मैं देना चाहूंगा जहां पत्नी का महत्त्व स्पष्ट हो जायेगा।


 यह उदाहरण स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के साथ जुड़ा हुआ है। श्रीराम जब अश्वमेध यज्ञ करने वाले थे, उससे पहले उन्होंने माता सीता को महल से निष्कासित करके वन में भेज दिया था। जब यज्ञ प्रारम्भ करने का समय आया तो माता सीता की अनुपस्थिति के कारण सभी दुविधा में आ गये थे क्योंकि यज्ञ आदि जितने भी धार्मिक अनुष्ठान हैं, वह सब पत्नी के बिना सम्पन्न नहीं हो सकते। इसलिये तत्काल माता सीता की स्वर्ण प्रतिमा बनवा कर उसे श्रीराम के साथ स्थापित किया गया, तब कहीं जाकर यज्ञ सम्पन्न हो पाया था। पत्नी के संदर्भ में जब श्रीराम की यह स्थिति थी तो आम व्यक्ति आज पत्नी के महत्त्व से कैसे इन्कार कर सकता है ? इसलिये हमेशा से माना जाता रहा है कि लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त करनी है तो पत्नी को सम्मान दो और उसे प्रसन्न रखो।


> साक्षात लक्ष्मी जी का प्रतिरूप होने के उपरांत भी पत्नी को परिवार से मिलने वाला व्यवहार प्रभावित तो करता ही है। इसलिये सभी का यह प्रयास होना चाहिये

कि वे ऐसा कुछ करते रहें जिससे पत्नी का मन हमेशा ही महका-महका रहे। इसमें बहुत कठिनाई अथवा समस्या नहीं है। आप अपने व्यवहार से पत्नी को प्रसन्न रख सकते हैं। इस बारे में तीन उपाय तो मैं आपको दे सकता हूं। यह तीनों उपाय बहुत ही सामान्य और सीधे हैं किन्तु इनका प्रभाव बहुत अधिक होता है। आप चाहें तो एक बार इन उपायों को आजमा कर देख सकते हैं


पहले उपाय के रूप में आप अपनी पत्नी को शादी की सालगिरह पर कोई भी उपहार दे सकते हैं। व्यक्ति के जीवन में अनेक अवसर ऐसे आते हैं जब केवल उपहार का महत्त्व ही आंका जाता है, यह नहीं देखा जाताकि वह उपहार कितना कीमती है। पत्नी को विवाह की सालगिरह पर आप चाहे छोटा ही सही, उपहार अवश्य दें। आपका यह छोटा सा उपहार प्राप्त करके पत्नी का मन खिल उठेगा और पूरा परिवार इससे महका-महका लगेगा। दूसरा उपाय इस प्रकार है- 


आपका कोई भी कार्य सम्पन्न होता है अथवा आप कोई नया कार्य कर रहे हैं तो उसमें से कुछ पैसा अलग से पत्नी को दें। यदि आप कहीं नौकरी करते हैं तो जब अपना वेतन लाते हैं, तो उसमें से अपनी इच्छा से कुछ धन निकाल कर पत्नी को दें फिर चाहें तो शेष राशि भी घर खर्च के रूप में पत्नी को ही दे सकते हैं। पति द्वारा इस प्रकार से पत्नी को जब कुछ धन मिलता है तो उसके मन में कितनी प्रसन्नता होती है, इसका अनुमान शायद आप नहीं लगा सकते हैं। अगर पत्नी प्रसन्न है तो फिर घर में किसी भी चीज का अभाव कैसे हो सकेगा ? तीसरा उपाय तो इनसे भी आसान है किन्तु पत्नी को प्रसन्न करने में पूरी तरह से सक्षम है। 


इस उपाय में आप महीने में एक अथवा दो बार पत्नी के साथ अवश्य घूमें-फिरें। इसके लिये यह आवश्यक नहीं है कि आप घूमने के लिये किसी पिकनिक स्पॉट का चयन करें। आप कहीं भी जा सकते हैं। एकाध घंटा भी आप अपनी पत्नी के साथ इस प्रकार घूमते हैं तो इसका बहुत गहरा प्रभाव पत्नी के मन पर पड़ता है। इसके पीछे कारण भी हैं जो इस उपाय को सार्थक सिद्ध करते हैं। जैसे व्यक्ति अपने व्यवसाय अथवा नौकरी में उलझे रहने से शारीरिक और मानसिक थकान का अनुभव करता है,


 वैसी थकान का अनुभव पत्नी भी करती है क्योंकि उसे भी सारा घर सम्भालना पड़ता है। पुरुष तो छुट्टी के दिन इधर-उधर घूम-फिर कर अपनी थकान दूर कर लेता है किन्तु पत्नी ऐसा नहीं कर पाती। जब आप उसे अपने साथ कहीं घुमाने के लिये ले जाते हैं तो उसे काफी अच्छा लगेगा। घर के वातावरण से अलग होकर आपके साथ घूमने-फिरने से पत्नी के तन और मन की थकान दूर होकर एक नवीन ताजगी का संचार होगा। परिणामस्वरूप वह और अधिक समर्पित भाव से घर-परिवार को सम्भालने में जुट जायेगी।


मैंने यहां जो कुछ लिखा है वह आम व्यक्तियों के दृष्टिकोण से लिखा है। जो कुछ मैंने लिखा है, वह अपने आस-पास अनेक बार देखा और अनुभव किया है। इसलिये आप इस अध्याय को गम्भीरता से लेकर मनन करें। मेरा विश्वास है कि आप इस प्रकार से पत्नी के साथ व्यवहार करते हैं तो आपको साक्षात लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त करने से कोई रोक नहीं सकता है। 


अपनी इस पुस्तक में धनदायक सरल प्रयोगों में के बारे में काफी कुछ लिखा है और इस पुस्तक को पढ़ने के बाद हमेशा की तरह पाठक पुस्तक में लिखे उपायों का प्रयोग भी अवश्य करेंगे। उन सभी को किये जाने वाले प्रयोगों से लाभ प्राप्त हो, इसलिये यह अध्याय लिखना आवश्यक हो गया था। अगर कोई अपनी पत्नी को दुःखी और प्रताड़ित करता है और अपनी आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिये लक्ष्मी जी की साधना, पूजा अथवा उन्हें प्रसन्न करने के लिये कोई उपाय करता है तो उसे लाभ मिलना संदिग्ध होगा। इस अध्याय को लिखने का उद्देश्य केवल यही है कि आप पहले यह देख लें कि कहीं अपनी पत्नी को किसी प्रकार से दुःखी एवं प्रताड़ित तो नहीं करते हैं? 


अगर करते हैं तो लक्ष्मी साधना का उपाय आपको फल नहीं देगा। इसलिये पत्नी को वास्तविक रूप में गृहलक्ष्मी का स्थान दें और फिर यदि आप किसी भी प्रकार का धन प्राप्ति का उपाय या टोटका  करते हैं तो आपको अवश्य ही इसका लाभ मिलेगा।


आप सभी को यह मानकर चलना चाहिये कि लक्ष्मी जी का वचन जो उन्होंने धर्मपत्नी के रूप में स्त्री को दिया है, वह आज भी प्रभाव रखता है। यही कारण है कि जब भी किसी पत्नी पर ससुराल पक्ष अथवा पति द्वारा अत्याचार किया जाता है तो पत्नी की मूक संवेदनायें लक्ष्मी जी तक अवश्य अपनी स्थिति का संदेश पहुंचाती है। 


लक्ष्मी जी त्वरित गति से पत्नी को परेशान करने वालों को दण्ड देती है। यदि आप लक्ष्मी जी के इस प्रकोप से भय खाकर भी अपनी पत्नी का सम्मान करते हैं और उनके साथ सहयोग की भावना रखते हैं तो आपको अन्य लाभ मिलने के साथ-साथ पत्नी का प्यार तथा परिवार में एक अच्छा वातावरण भी प्राप्त होगा।

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