होली पर किये जाने वाले धन प्राप्ति के उपाय -2
> यह उपाय आपके लिये अत्यन्त लाभदायक है। इस उपाय के प्रभाव से आपके निवास की सारी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होगी। नकारात्मक ऊर्जा के समाप्त होते ही आपके निवास में माँ लक्ष्मी का स्थाईवास होगा, यह मेरा अनुभव है। आपके निवास के पास जब होली जल जाये तब आप होली की थोड़ी सी अग्नि लाकर अपने निवास व व्यवसाय स्थल के बाहर की ओर आग्नेय कोण में, उस अग्नि की मदद से एक सरसों के तेल का दीपक जला दें। इस दीपक की मदद से एक दूसरा दीपक जलायें और इसे मुख्य द्वार के बाहर रख दें। जब दीपक जल कर ठण्डा हो जाये इन्हें उठा कर चौराहे पर ले जाकर फोड़ दें और बिना पीछे देखे सीधे घर आ जायें भीतर आने से पहले अपने हाथ-पांव अवश्य धो लें। इस उपाय से आपके निवास व व्यवसाय स्थल सारी नकारात्मक ऊर्जा जलकर समाप्त हो जायेगी।
> आप होली की रात्रि में होलिका दहन से पहले अपने निवास के पूजा स्थल में माँ लक्ष्मी को रोली व लाल गुलाल मिलाकर तिलक करें। शुद्ध घी का दीपक व धूप-अगरबत्ती अर्पित कर कोई पीला प्रसाद अर्पित करने के पश्चात् चरणों में पीला गुलाल व तीन अभिमंत्रित गोमती चक्र अर्पित करें। अब तस्वीर के समक्ष लाल अथवा सफेद आसन पर बैठ कर कमलगट्टे की माला से 5 माला श्रीं ह्रीं श्रीं कमलवासिन्यै नमोस्तुते का जाप करें। जाप के बाद प्रणाम कर उठ जायें।
अब अगले दिन माँ लक्ष्मी के चरणों से पीला गुलाल व तीनों गोमती चक्र उठा कर एक लाल वस्त्र में बांध कर घर के शुद्ध स्थान पर रख दें। इस उपाय से एक वर्ष के लिये लक्ष्मी के चरण आपके निवास में उस पोटली में ही रहेंगे, ये मेरा विश्वास है। दूसरे साल आप पुनः इस उपाय को फिर इसी विधि से करें। इस प्रयोग को करने से पहले अर्थात् होली के एक दिन पूर्व पहले वाली पोटली को धूप-अगरबत्ती अर्पित करें। अगरबत्ती जब पूरी तरह से जल जाये तो इस पोटली को जल में प्रवाहित कर दें। इसके स्थान पर पुनः यह प्रयोग करके पाटली को इस स्थान पर रख दें। मेरी सलाह यह है कि आप इस प्रयोग को प्रत्येक साल होली के अवसर पर अवश्य करें। फिर लक्ष्मी जी की आप पर कृपा हमेशा ही बनी रहेगी।
> होली की रात्रि में आप एक चांदी का गिलास अथवा कटोरी लेकर उसमें जल भरकर थोड़ा गंगाजल मिला दें। उसमें 3-3 अभिमंत्रित गोमती चक्र एवं धनकारक कौड़ियां डाल दें। अब आप माँ लक्ष्मी की तस्वीर को रोली व लाल गुलाल मिला कर तिलक-बिन्दी कर धूप-दीप करें। खीर का भोग अर्पित करें। चरणों में भी लाल गुलाल अर्पित करें।
अब अपनी सामर्थ्यानुसार संख्या में श्री लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें तथा 3 माला श्री लक्ष्मीभ्यो नमोस्तुते का जाप करें। जाप के बाद उस जल को में ही रखा रहने दें। अगले दिन एक लकड़ी अथवा चांदी की डिब्बी में माँ के चरणों से लाल गुलाल लेकर भर दें। जल में से चक्र एवं कौड़िया निकाल कर डिब्बी में रख पूजा स्थल दें। यदि डिब्बी में गुलाल कम हो तो अलग से लाल गुलाल लेकर डिब्बी को पूरा भर कर एक लाल रेशमी वस्त्र में बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। आपके पास जो जल बचा है, उस जल को अपने निवास की दीवारों पर छिड़क दें।
> यदि आपको लगता है कि आप अपने कर्म करने में कमजोर नहीं हैं अर्थात आप मेहनत तो बहुत करते हैं परन्तु किसी न किसी कारण से आपकी आय में कमी रहती है अथवा आपको लगता है कि आपके निवास में कोई नकारात्मक ऊर्जा है। अथवा किसी की नजर के प्रभाव से आपके निवास में माँ लक्ष्मी का प्रवेश आसानी से नहीं होता है तो आप होली की रात्रि में यह उपाय करें। आपको अवश्य ही लाभ होगा।
आपके निवास के पास जिस स्थान पर होलिका दहन होता है, उस क्षेत्र के पश्चिम दिशा में आप एक गड्ढा कर उसमें चार बड़ी कीलें दबा कर साथ में 11 लौंग और हरा गुलाल भर कर गड्ढे को मिट्टी से पूर दें। जब होलिका दहन का समय हो तो एक पान के पत्ते पर 5 बताशे, एक छोटी कील, एक लौंग का जोड़ा, कुछ काले तिल व पीली सरसों रखकर एक अन्य दूसरे पान के पत्ते से ढक दें। उस पान के पत्ते पर सात बताशे रखें। अब आप परिक्रमा आरम्भ करें, प्रत्येक परिक्रमा की समाप्ति पर एक बताशा होलिका में अर्पित करते जायें। सात परिक्रमा पूर्ण होने पर अन्तिम परिक्रमा में पान के पत्ते की सामग्री होलिका में ही अर्पित करें और प्रणाम कर आ जायें। होली की मध्यरात्रि में आप अपने निवास के पूजा स्थल में माँ लक्ष्मी को लाल गुलाल से तिलक-बिन्दी करें और शुद्ध घी का दीपक व धूप-अगरबत्ती के साथ भोग भी अर्पित करें। कमलगट्टे की माला से 5 माला श्री ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायण नमोस्तुते का जाप करें। जाप के बाद प्रणाम कर उठ जायें। अगले दिन आप होलिका स्थान पर जाकर गड्ढे में से चारों कीलें निकाल कर लायें और अपने निवास के चारों कोनों में बाहर की ओर से एक-एक कील ठोक दें। इसके प्रभाव से आपके निवास में कभी भी कोई नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होगा और न ही किसी की कोई बुरी नजर का प्रभाव आयेगा। यह उपाय आप अपने व्यवसाय स्थल के लिये भी कर सकते हैं।
विशेष- मैं पुनः आपको बताना चाहता हूं कि अगर यह उपाय आप इसी विधि से कर पाने में सक्षम हैं तो इसी प्रकार से करें किन्तु यदि किसी कारण से होलिका दहन स्थान पर गड्ढा करके सामग्री दबाने और होलिका दहन के बाद इनके पुनः प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई का अनुभव करें तो इसे भी होलिका की राख को लाकर उसमें कील आदि सामग्री को दबा कर दूसरे दिन कीलों का यथाविधि से प्रयोग करें। राख को जल में प्रवाहित करना है। ध्यान रहे कि होलिका दहन के समय जो भी प्रयोग नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिये करते हैं अथवा किसी शत्रु बाधा को दूर करने की दृष्टि से किये जाते हैं तो वे अवश्य सही सिद्ध होते हैं। इसलिये इस • उपाय को आप अवश्य करें। फिर जो लाभ आपको मिलेगा, उससे इस उपाय का चमत्कार आप अवश्य स्वीकार करेंगे।
> होली की रात्रि में आप विधि-विधान से माँ लक्ष्मी को लाल गुलाल से तिलक कर शुद्ध घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती एवं कोई भोग अर्पित करें। एक लाल वस्त्र में लाल गुलाल एवं एक पीले वस्त्र में पीला गुलाल रख कर दोनों को पोटली का रूप देकर माँ लक्ष्मी के चरणों में रख दें। अब आप कोई भी माँ लक्ष्मी के मंत्र का तीन माला जाप करें। जाप के बाद प्रणाम कर उठ जायें। अगले दिन लाल एवं पीले वस्त्र की दोनों पोटलियों को एक साथ बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। अब चमत्कार आप स्वयं अनुभव करें।
होली की रात्रि में आप अपने निवास के पूजा स्थल में एक लाल वस्त्र पर नागकेशर बिछा कर उस पर एक अभिमंत्रित श्रीयंत्र को स्थान दें। यंत्र को लाल गुलाल से तिलक करें तथा शुद्ध घी का दीपक व धूप-अगरबत्ती के साथ भोग अर्पित करें। अब आप यंत्र के समक्ष आसन पर बैठ कर कमलगट्टे की माला से तीन माला श्रीं श्रिययै नमोस्तुते का जाप करें। जाप के बाद प्रणाम कर उठ जायें। अगले दिन लाल वस्त्र को यंत्र एवं नागकेशर सहित उठा कर बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। यह उपाय आपको कितना लाभ देगा, यह तो आप स्वयं ही अनुभव करेंगे।
